नवरात्रि आते ही घर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। सुबह की पूजा, मंदिर से आती घंटियों की आवाज, फूलों की खुशबू और शाम को जलता हुआ दीपक—ये सभी चीजें मन को एक अलग शांति देती हैं। बहुत से लोग इन नौ दिनों में व्रत रखते हैं और अनाज के स्थान पर फलाहारी भोजन करते हैं।
व्रत का भोजन साधारण जरूर होता है, लेकिन सही तरीके से बनाया जाए तो यह स्वाद में किसी त्योहार की दावत से कम नहीं लगता। इस नवरात्रि आप साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू की पूरी, व्रत वाले आलू और मखाना खीर से पूरी फलाहारी थाली तैयार कर सकते हैं।
नवरात्रि क्या है?
नवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है—नौ रातें। इस दौरान देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के एक अलग रूप को समर्पित होता है।

देवी के नौ रूप इस प्रकार हैं:
- मां शैलपुत्री
- मां ब्रह्मचारिणी
- मां चंद्रघंटा
- मां कूष्मांडा
- मां स्कंदमाता
- मां कात्यायनी
- मां कालरात्रि
- मां महागौरी
- मां सिद्धिदात्री
भारत में मुख्य रूप से चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि बड़े स्तर पर मनाई जाती हैं। चैत्र नवरात्रि सामान्यतः मार्च-अप्रैल के आसपास और शारदीय नवरात्रि सितंबर-अक्टूबर के आसपास आती है।
नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर से नौ दिनों तक युद्ध किया और दसवें दिन उसका वध किया। इसलिए नवरात्रि को बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर शक्ति की विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं है। यह आत्मसंयम, अनुशासन और अपने विचारों को सकारात्मक बनाने का भी अवसर है। भक्त इन दिनों पूजा-पाठ करते हैं, सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं और क्रोध, छल तथा नकारात्मक व्यवहार से दूर रहने का प्रयास करते हैं।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्रि
नवरात्रि पूरे भारत में मनाई जाती है, लेकिन हर क्षेत्र में इसकी परंपरा थोड़ी अलग दिखाई देती है।
- पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में इसे दुर्गा पूजा के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
- गुजरात में गरबा और डांडिया नवरात्रि के प्रमुख आकर्षण होते हैं।
- उत्तर भारत में लोग व्रत रखते हैं, माता की चौकी करते हैं और कन्या पूजन करते हैं।
- दक्षिण भारत के कई हिस्सों में गुड़ियों और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को सजाकर गोलू की परंपरा निभाई जाती है।
- हिमाचल प्रदेश में कुल्लू दशहरा नवरात्रि के बाद विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
अलग-अलग परंपराओं के बावजूद इस पर्व का मूल भाव शक्ति की आराधना और सकारात्मकता की विजय है।
नवरात्रि व्रत रखने का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से नवरात्रि व्रत करने और मां दुर्गा की पूजा करने से भक्त को मानसिक शांति, आत्मबल और देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। व्रत व्यक्ति को अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखने और अनुशासित जीवन का अभ्यास करने का अवसर भी देता है।
व्रत के नियम हर परिवार और क्षेत्र में अलग हो सकते हैं। इसलिए भोजन तैयार करने से पहले अपने घर की परंपरा को प्राथमिकता देना उचित है।
नवरात्रि व्रत में क्या खाया जाता है?
व्रत में सामान्यतः गेहूं, चावल, दाल, साधारण नमक, प्याज और लहसुन का उपयोग नहीं किया जाता। इनके स्थान पर कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा, सामक के चावल, साबूदाना, आलू, शकरकंद, मखाना, फल और दूध से बने खाद्य पदार्थ लिए जाते हैं।
साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। हालांकि, व्रत में खाई जाने वाली चीजों के नियम अलग-अलग घरों में बदल सकते हैं।
नवरात्रि स्पेशल फलाहारी थाली
इस थाली में चार व्यंजन शामिल हैं:
- साबूदाना खिचड़ी
- कुट्टू के आटे की पूरी
- बिना प्याज-लहसुन के व्रत वाले आलू
- मखाना खीर
यह मात्रा लगभग चार लोगों के लिए पर्याप्त है।
साबूदाना खिचड़ी की रेसिपी
आवश्यक सामग्री
- साबूदाना – 1½ कप
- उबले हुए आलू – 2 मध्यम आकार के
- भुनी हुई मूंगफली – ½ कप
- घी – 2 बड़े चम्मच
- जीरा – 1 छोटा चम्मच
- हरी मिर्च – 2
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- नींबू का रस – 1 बड़ा चम्मच
- हरा धनिया – थोड़ा-सा
बनाने की विधि
साबूदाने को दो से तीन बार पानी से धो लें। इससे उसका अतिरिक्त स्टार्च निकल जाएगा और खिचड़ी चिपचिपी नहीं बनेगी।
धुले हुए साबूदाने में उतना ही पानी डालें जितने में वह हल्का डूब जाए। इसे चार से छह घंटे या रातभर ढककर रखें। पकाने से पहले एक दाना उँगलियों के बीच दबाकर देखें। यदि वह आसानी से दब जाए, तो साबूदाना तैयार है।
मूंगफली को दरदरा पीस लें और साबूदाने में मिला दें। इससे दाने अलग-अलग बने रहते हैं और स्वाद भी बढ़ता है।
कड़ाही में घी गर्म करके जीरा और कटी हुई हरी मिर्च डालें। अब छोटे टुकड़ों में कटे उबले आलू डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।
इसके बाद साबूदाना और सेंधा नमक डालें। मध्यम आंच पर चार से छह मिनट तक हल्के हाथ से चलाते हुए पकाएं। जब साबूदाने के दाने पारदर्शी होने लगें, तब गैस बंद कर दें।
अंत में नींबू का रस और बारीक कटा हरा धनिया मिलाएं।
कुट्टू के आटे की पूरी
आवश्यक सामग्री
- कुट्टू का आटा – 1½ कप
- उबले हुए आलू – 2 मध्यम आकार के
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- जीरा – ½ छोटा चम्मच
- हरा धनिया – वैकल्पिक
- पानी – जरूरत के अनुसार
- तलने के लिए तेल या घी
बनाने की विधि
उबले आलू को अच्छी तरह मसल लें। इसमें कुट्टू का आटा, सेंधा नमक और जीरा डालकर मिलाएं।
आलू की नमी से ही आटा काफी हद तक गूंथ जाएगा। जरूरत हो तो एक-एक चम्मच पानी डालते हुए हल्का सख्त आटा तैयार करें। अधिक पानी डालने से आटा चिपचिपा हो सकता है।
आटे की छोटी लोइयां बनाएं। एक साफ प्लास्टिक शीट या घी लगी सतह के बीच लोई रखकर धीरे-धीरे पूरी के आकार में बेलें।
कड़ाही में तेल या घी मध्यम गर्म करें। पूरी डालकर हल्का दबाएं। फूलने के बाद उसे पलटकर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें।
व्रत वाले आलू की सब्जी
आवश्यक सामग्री
- उबले हुए आलू – 5 मध्यम आकार के
- टमाटर – 2
- घी या तेल – 2 बड़े चम्मच
- जीरा – 1 छोटा चम्मच
- हरी मिर्च – 2
- कद्दूकस किया अदरक – 1 छोटा चम्मच
- काली मिर्च पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- सेंधा नमक – स्वादानुसार
- पानी – लगभग 1½ कप
- हरा धनिया – सजाने के लिए
बनाने की विधि
उबले आलू छीलकर हाथ से मध्यम टुकड़ों में तोड़ लें। टमाटर को बारीक काट लें या मिक्सर में पीस लें।
कड़ाही में घी गर्म करके जीरा डालें। जीरा चटकने पर हरी मिर्च और अदरक डालकर कुछ सेकंड भूनें।
अब टमाटर डालकर मध्यम आंच पर नरम होने तक पकाएं। इसके बाद आलू, काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर दो मिनट भूनें।
लगभग डेढ़ कप पानी मिलाकर सब्जी को धीमी आंच पर आठ से दस मिनट पकाएं। ग्रेवी को गाढ़ा करने के लिए आलू के कुछ टुकड़े हल्के मसल दें।
अंत में हरा धनिया डालें। यदि आपके घर में व्रत के दौरान टमाटर नहीं खाया जाता, तो इसे छोड़कर केवल जीरा, अदरक और काली मिर्च से भी यह सब्जी बनाई जा सकती है।
मखाना खीर की रेसिपी
आवश्यक सामग्री
- मखाना – 2 कप
- दूध – 1 लीटर
- घी – 1 बड़ा चम्मच
- चीनी – 5 से 6 बड़े चम्मच
- इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- कटे हुए बादाम – 1 बड़ा चम्मच
- कटे हुए काजू – 1 बड़ा चम्मच
- पिस्ता – सजाने के लिए
- केसर – वैकल्पिक
बनाने की विधि
कड़ाही में घी गर्म करके मखाने डालें। उन्हें धीमी आंच पर कुरकुरा होने तक भूनें। मखाने ठंडे होने के बाद आधे मखानों को दरदरा पीस लें और बाकी को साबुत रहने दें।
एक भारी तले वाले बर्तन में दूध उबालें। दूध में साबुत और पिसे हुए दोनों मखाने डालें।
खीर को धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट तक पकाएं। बीच-बीच में चलाते रहें ताकि दूध बर्तन की तली में न लगे।
जब दूध थोड़ा गाढ़ा हो जाए और मखाने नरम हो जाएं, तब चीनी डालें। दो से तीन मिनट और पकाने के बाद इलायची, बादाम, काजू और केसर मिलाएं।
मखाना खीर को गर्म भी परोसा जा सकता है और ठंडा भी। ठंडा होने के बाद यह थोड़ी और गाढ़ी हो जाती है।
पूरी थाली कैसे परोसें?
एक बड़ी थाली में साबूदाना खिचड़ी और कुट्टू की पूरी रखें। साथ में कटोरी में व्रत वाले आलू और मखाना खीर परोसें। खीरे का रायता, फल और नींबू भी शामिल किए जा सकते हैं।
पूजा या व्रत का भोजन बनाने से पहले रसोई और बर्तनों की स्वच्छता का ध्यान रखें। अगर परिवार में व्रत के लिए अलग बर्तन इस्तेमाल करने की परंपरा है, तो उन्हीं में भोजन तैयार करें।
स्वाद बेहतर बनाने के उपयोगी सुझाव
- साबूदाना अधिक पानी में न भिगोएं, वरना खिचड़ी चिपचिपी हो सकती है।
- कुट्टू का आटा जल्दी सूखता और टूटता है, इसलिए आटा गूंथने के तुरंत बाद पूरी बना लें।
- व्रत के आलू में केवल वही मसाले डालें जो आपके घर की परंपरा में स्वीकार किए जाते हैं।
- मखाने को दूध में डालने से पहले घी में भूनने से खीर का स्वाद बेहतर होता है।
- सेंधा नमक भी सीमित मात्रा में ही डालें।
आस्था और स्वाद का सुंदर मेल
नवरात्रि हमें शक्ति की आराधना के साथ संयम और अनुशासन का महत्व भी समझाती है। इन नौ दिनों में बनाया गया सादा फलाहारी भोजन केवल व्रत पूरा करने का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार के साथ बैठकर भक्ति और त्योहार की खुशी साझा करने का अवसर भी है।
इस नवरात्रि घर पर यह फलाहारी थाली बनाइए और मां दुर्गा की आराधना के साथ सात्त्विक भोजन का आनंद लीजिए।