नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। मां का यह रूप शांत भी है और शक्तिशाली भी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस देती हैं और भय तथा नकारात्मक विचारों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती हैं।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री और दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के बाद तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। यह स्वरूप हमें बताता है कि जीवन में शांत स्वभाव रखने के साथ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी होना चाहिए।
मां चंद्रघंटा का नाम कैसे पड़ा?
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप तेजस्वी और वीरता से भरा हुआ माना गया है।
पारंपरिक चित्रों में मां चंद्रघंटा को दस भुजाओं और सिंह की सवारी करते हुए दिखाया जाता है। उनके हाथों में कमल, कमंडल, धनुष, तलवार और अन्य अस्त्र-शस्त्र होते हैं। मां का एक हाथ भक्तों को आशीर्वाद देता है। उनका चेहरा शांत है, लेकिन उनका युद्ध के लिए तैयार स्वरूप बुरी शक्तियों के विरुद्ध साहस का प्रतीक है।
मां चंद्रघंटा से जुड़ी पौराणिक कथा
लोकप्रिय धार्मिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह करना स्वीकार किया।
जब भगवान शिव विवाह के लिए अपनी बारात लेकर पहुंचे, तब उनका रूप अत्यंत विचित्र और भयावह था। उनके शरीर पर भस्म लगी थी और उनके साथ भूत-प्रेत तथा गणों की बारात थी। यह दृश्य देखकर माता पार्वती के परिवार के लोग घबरा गए।
तब माता पार्वती ने एक तेजस्वी और शक्तिशाली स्वरूप धारण किया। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र था और वे अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित थीं। यही स्वरूप मां चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद माता ने भगवान शिव से सौम्य रूप धारण करने का अनुरोध किया और विवाह की सभी रस्में पूरी हुईं।
इस कथा के अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ भिन्न रूप भी सुनने को मिलते हैं। इसका मुख्य संदेश साहस, आत्मविश्वास और परिवार की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व
मां चंद्रघंटा की पूजा वीरता और निर्भयता का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना करने से मन का डर कम होता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की हिम्मत मिलती है।
इस दिन की पूजा से हमें ये संदेश मिलते हैं:
- परेशानी के समय घबराने की जगह धैर्य रखना चाहिए।
- अन्याय के सामने चुप नहीं रहना चाहिए।
- मन को शांत रखते हुए सही निर्णय लेना चाहिए।
- बाहरी शक्ति के साथ अंदर से मजबूत होना भी जरूरी है।
- परिवार और समाज की रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
पूजा का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि मां के गुणों को अपने जीवन में अपनाना भी है।
मां चंद्रघंटा की पूजा सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एक स्थान पर रख लें:
- मां चंद्रघंटा की तस्वीर या प्रतिमा
- गंगाजल या स्वच्छ जल
- रोली और अक्षत
- लाल, सफेद या पीले फूल
- धूप और घी का दीपक
- फल और सूखे मेवे
- दूध या दूध से बनी मिठाई
- मखाना खीर का भोग
- माता की चुनरी
- कपूर और आरती की थाली
यदि आपने नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की है, तो तीसरे दिन नया कलश स्थापित करने की जरूरत नहीं होती। पहले से स्थापित कलश और अखंड ज्योति के सामने ही पूजा की जा सकती है।
मां चंद्रघंटा की पूजा-विधि
1. पूजा की तैयारी करें
सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा के स्थान की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। इसके बाद मन में मां चंद्रघंटा का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
2. दीपक जलाएं
कलश और माता की तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। यदि घर में अखंड ज्योति जलाई गई है, तो उसकी सावधानीपूर्वक देखभाल करें।
3. माता को पूजा सामग्री अर्पित करें
मां को रोली से तिलक लगाएं और अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद फूल, चुनरी, फल और सूखे मेवे अर्पित करें। धूप जलाकर पूरे पूजा स्थान में घुमाएं।
4. मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप करें
मां का ध्यान करते हुए इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। मंत्र की संख्या से अधिक जरूरी मन की एकाग्रता और सच्ची भावना है।
5. भोग लगाएं
मां चंद्रघंटा को दूध, दूध से बनी मिठाई या मखाना खीर का भोग लगाया जाता है। भोग लगाने के बाद कुछ समय तक उसे पूजा स्थान पर रखें।
6. आरती और प्रार्थना करें
अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट दें।
मां चंद्रघंटा को कौन-सा भोग लगाया जाता है?
कई परिवारों में नवरात्रि के तीसरे दिन माता को दूध और दूध से बनी चीजों का भोग लगाने की परंपरा है। खीर, दूध की मिठाई, मखाना खीर या दूध से बना हलवा भोग में रखा जा सकता है।
व्रत के लिए मखाना खीर अच्छा विकल्प है। इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और यह प्रसाद के साथ परिवार के लिए मीठे व्यंजन के रूप में भी परोसी जा सकती है।
नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा, कथा, महत्व और मखाना खीर का भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। मां का यह रूप शांत भी है और शक्तिशाली भी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को साहस देती हैं और भय तथा नकारात्मक विचारों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती हैं।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री और दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के बाद तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। यह स्वरूप हमें बताता है कि जीवन में शांत स्वभाव रखने के साथ अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी होना चाहिए।
मां चंद्रघंटा का नाम कैसे पड़ा?
मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है। इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप तेजस्वी और वीरता से भरा हुआ माना गया है।
पारंपरिक चित्रों में मां चंद्रघंटा को दस भुजाओं और सिंह की सवारी करते हुए दिखाया जाता है। उनके हाथों में कमल, कमंडल, धनुष, तलवार और अन्य अस्त्र-शस्त्र होते हैं। मां का एक हाथ भक्तों को आशीर्वाद देता है। उनका चेहरा शांत है, लेकिन उनका युद्ध के लिए तैयार स्वरूप बुरी शक्तियों के विरुद्ध साहस का प्रतीक है।
मां चंद्रघंटा से जुड़ी पौराणिक कथा
लोकप्रिय धार्मिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह करना स्वीकार किया।
जब भगवान शिव विवाह के लिए अपनी बारात लेकर पहुंचे, तब उनका रूप अत्यंत विचित्र और भयावह था। उनके शरीर पर भस्म लगी थी और उनके साथ भूत-प्रेत तथा गणों की बारात थी। यह दृश्य देखकर माता पार्वती के परिवार के लोग घबरा गए।
तब माता पार्वती ने एक तेजस्वी और शक्तिशाली स्वरूप धारण किया। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र था और वे अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित थीं। यही स्वरूप मां चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसके बाद माता ने भगवान शिव से सौम्य रूप धारण करने का अनुरोध किया और विवाह की सभी रस्में पूरी हुईं।
इस कथा के अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ भिन्न रूप भी सुनने को मिलते हैं। इसका मुख्य संदेश साहस, आत्मविश्वास और परिवार की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
नवरात्रि के तीसरे दिन का महत्व
मां चंद्रघंटा की पूजा वीरता और निर्भयता का प्रतीक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना करने से मन का डर कम होता है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की हिम्मत मिलती है।
इस दिन की पूजा से हमें ये संदेश मिलते हैं:
- परेशानी के समय घबराने की जगह धैर्य रखना चाहिए।
- अन्याय के सामने चुप नहीं रहना चाहिए।
- मन को शांत रखते हुए सही निर्णय लेना चाहिए।
- बाहरी शक्ति के साथ अंदर से मजबूत होना भी जरूरी है।
- परिवार और समाज की रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
पूजा का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि मां के गुणों को अपने जीवन में अपनाना भी है।
मां चंद्रघंटा की पूजा सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एक स्थान पर रख लें:
- मां चंद्रघंटा की तस्वीर या प्रतिमा
- गंगाजल या स्वच्छ जल
- रोली और अक्षत
- लाल, सफेद या पीले फूल
- धूप और घी का दीपक
- फल और सूखे मेवे
- दूध या दूध से बनी मिठाई
- मखाना खीर का भोग
- माता की चुनरी
- कपूर और आरती की थाली
यदि आपने नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की है, तो तीसरे दिन नया कलश स्थापित करने की जरूरत नहीं होती। पहले से स्थापित कलश और अखंड ज्योति के सामने ही पूजा की जा सकती है।
मां चंद्रघंटा की पूजा-विधि
1. पूजा की तैयारी करें
सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा के स्थान की सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। इसके बाद मन में मां चंद्रघंटा का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
2. दीपक जलाएं
कलश और माता की तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। यदि घर में अखंड ज्योति जलाई गई है, तो उसकी सावधानीपूर्वक देखभाल करें।
3. माता को पूजा सामग्री अर्पित करें
मां को रोली से तिलक लगाएं और अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद फूल, चुनरी, फल और सूखे मेवे अर्पित करें। धूप जलाकर पूरे पूजा स्थान में घुमाएं।
4. मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप करें
मां का ध्यान करते हुए इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। मंत्र की संख्या से अधिक जरूरी मन की एकाग्रता और सच्ची भावना है।
5. भोग लगाएं
मां चंद्रघंटा को दूध, दूध से बनी मिठाई या मखाना खीर का भोग लगाया जाता है। भोग लगाने के बाद कुछ समय तक उसे पूजा स्थान पर रखें।
6. आरती और प्रार्थना करें
अंत में मां दुर्गा की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। पूजा पूरी होने के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांट दें।
मां चंद्रघंटा को कौन-सा भोग लगाया जाता है?
कई परिवारों में नवरात्रि के तीसरे दिन माता को दूध और दूध से बनी चीजों का भोग लगाने की परंपरा है। खीर, दूध की मिठाई, मखाना खीर या दूध से बना हलवा भोग में रखा जा सकता है।
व्रत के लिए मखाना खीर अच्छा विकल्प है। इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और यह प्रसाद के साथ परिवार के लिए मीठे व्यंजन के रूप में भी परोसी जा सकती है।
नवरात्रि स्पेशल मखाना खीर की रेसिपी
मखाना खीर स्वाद में हल्की, मलाईदार और सुगंधित होती है। इसे फलाहारी सामग्री से बनाया जाता है, इसलिए यह सामान्यतः नवरात्रि व्रत में भी खाई जाती है। फिर भी अपने परिवार की व्रत परंपरा के अनुसार सामग्री का चुनाव करें।
रेसिपी की जानकारी
- तैयारी का समय: 10 मिनट
- पकाने का समय: 30 से 35 मिनट
- कुल समय: लगभग 45 मिनट
- कितने लोगों के लिए: 4
- प्रकार: फलाहारी मीठा और माता का भोग
मखाना खीर की सामग्री
- फुल क्रीम दूध – 1 लीटर
- मखाना – 2 कप
- घी – 1 बड़ा चम्मच
- चीनी या मिश्री – 4 से 5 बड़े चम्मच
- इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- बादाम – 8 से 10
- काजू – 8 से 10
- किशमिश – 1 बड़ा चम्मच
- केसर – 6 से 7 धागे, वैकल्पिक
- पिस्ता – सजाने के लिए, वैकल्पिक
मखाना खीर बनाने की विधि
1. मखाने भूनें
एक भारी तले की कड़ाही में घी गर्म करें। इसमें मखाने डालकर धीमी आंच पर लगभग 5 से 6 मिनट तक भूनें। मखाने कुरकुरे हो जाने चाहिए।
एक मखाना हाथ से तोड़कर देखें। यदि वह आसानी से टूट रहा है, तो वह अच्छी तरह भुन चुका है।
2. मखानों को थोड़ा तोड़ लें
भुने हुए मखानों को ठंडा होने दें। आधे मखानों को साबुत रखें और बाकी को मिक्सर में हल्का दरदरा पीस लें। दरदरे मखाने डालने से खीर गाढ़ी और मलाईदार बनती है।
3. दूध उबालें
एक भारी तले वाले बर्तन में दूध डालकर उबालें। उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें। दूध को लगभग 10 मिनट तक पकाएं और बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह नीचे चिपके नहीं।
4. मखाने डालें
अब दूध में साबुत और दरदरे मखाने डालें। धीमी आंच पर 12 से 15 मिनट तक पकाएं। मखाने धीरे-धीरे दूध को सोखकर मुलायम हो जाएंगे।
5. चीनी और मेवे मिलाएं
खीर थोड़ी गाढ़ी हो जाने पर चीनी या मिश्री डालें। इसमें कटे हुए काजू, बादाम, किशमिश और इलायची पाउडर मिलाएं। चीनी डालने के बाद खीर को लगभग 5 मिनट और पकाएं।
यदि केसर डालना हो, तो उसे एक चम्मच गर्म दूध में भिगोकर खीर में मिला दें।
6. भोग के लिए तैयार करें
गैस बंद करके खीर को थोड़ा ठंडा होने दें। भोग लगाते समय खीर बहुत ज्यादा गर्म नहीं होनी चाहिए। इसे साफ कटोरी में निकालें, ऊपर से बादाम और पिस्ता सजाएं और माता को अर्पित करें।
खीर को स्वादिष्ट बनाने के जरूरी सुझाव
- मखानों को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनें, तभी उनमें कुरकुरापन और अच्छी खुशबू आएगी।
- खीर बनाने के लिए भारी तले का बर्तन इस्तेमाल करें।
- दूध को पकाते समय लगातार चलाते रहें।
- खीर को ज्यादा गाढ़ा न करें, क्योंकि ठंडी होने के बाद यह और गाढ़ी हो जाती है।
- भोग के लिए बनाई गई खीर को पहले चखने से बचें।
- चीनी की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं।
- यदि व्रत में पैकेट वाली सामग्री प्रयोग कर रहे हैं, तो उसका लेबल जरूर जांच लें।
नवरात्रि के तीसरे दिन क्या भोजन बना सकते हैं?
मखाना खीर के साथ एक साधारण फलाहारी भोजन तैयार किया जा सकता है:
- कुट्टू के आटे की पूड़ी
- साबूदाना खिचड़ी
- सेंधा नमक वाला आलू
- खीरे का फलाहारी रायता
- हरी धनिया की व्रत वाली चटनी
- मखाना खीर
इस तरह का भोजन ज्यादा भारी भी नहीं लगता और त्योहार का स्वाद भी बना रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है?
तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है।
मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाना चाहिए?
कई परंपराओं में दूध, खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है। मखाना खीर भी अच्छा फलाहारी विकल्प है।
मां चंद्रघंटा का वाहन क्या है?
पारंपरिक रूप से मां चंद्रघंटा को सिंह पर आरूढ़ दिखाया जाता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन कौन-सा रंग पहनना चाहिए?
नवरात्रि के नौ दिनों के विशेष रंग हर वर्ष दिन और वार के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए संबंधित वर्ष के स्थानीय पंचांग के अनुसार रंग चुनना बेहतर है।
क्या बिना व्रत रखे मां की पूजा कर सकते हैं?
हां, व्रत रखना व्यक्तिगत श्रद्धा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। बिना व्रत रखे भी स्वच्छ मन और सच्ची भावना से पूजा की जा सकती है।
निष्कर्ष
नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की आराधना के माध्यम से साहस, शांति और आत्मविश्वास का संदेश देता है। मां का स्वरूप बताता है कि कोमलता और शक्ति एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं। सही समय पर शांत रहना और जरूरत पड़ने पर मजबूती से खड़ा होना ही सच्ची शक्ति है।
इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने के बाद घर की बनी मखाना खीर का भोग लगाएं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। त्योहार की असली सुंदरता महंगे पकवानों में नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ पूजा और प्रेम से तैयार किए गए भोजन में होती है।
इस तरह का भोजन ज्यादा भारी भी नहीं लगता और त्योहार का स्वाद भी बना रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि के तीसरे दिन किस देवी की पूजा होती है?
तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है।
मां चंद्रघंटा को क्या भोग लगाना चाहिए?
कई परंपराओं में दूध, खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है। मखाना खीर भी अच्छा फलाहारी विकल्प है।
मां चंद्रघंटा का वाहन क्या है?
पारंपरिक रूप से मां चंद्रघंटा को सिंह पर आरूढ़ दिखाया जाता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन कौन-सा रंग पहनना चाहिए?
नवरात्रि के नौ दिनों के विशेष रंग हर वर्ष दिन और वार के अनुसार बदल सकते हैं। इसलिए संबंधित वर्ष के स्थानीय पंचांग के अनुसार रंग चुनना बेहतर है।
क्या बिना व्रत रखे मां की पूजा कर सकते हैं?
हां, व्रत रखना व्यक्तिगत श्रद्धा और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। बिना व्रत रखे भी स्वच्छ मन और सच्ची भावना से पूजा की जा सकती है।
निष्कर्ष
नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा की आराधना के माध्यम से साहस, शांति और आत्मविश्वास का संदेश देता है। मां का स्वरूप बताता है कि कोमलता और शक्ति एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं। सही समय पर शांत रहना और जरूरत पड़ने पर मजबूती से खड़ा होना ही सच्ची शक्ति है।
इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने के बाद घर की बनी मखाना खीर का भोग लगाएं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। त्योहार की असली सुंदरता महंगे पकवानों में नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ पूजा और प्रेम से तैयार किए गए भोजन में होती है।
