Uncategorized

छठ पूजा का पहला दिन: नहाय-खाय का महत्व, पूजा विधि और कद्दू-भात की रेसिपी

छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का पहला दिन शुद्धता, सात्त्विक भोजन और संयम को समर्पित रहता है। इस दिन व्रती स्नान करके घर और पूजा-स्थल की सफाई करते हैं तथा बिना प्याज-लहसुन का शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं।

बिहार और झारखंड के घरों में नहाय-खाय के दिन बनने वाले कद्दू-भात और चने की दाल की खुशबू से ही छठ पर्व के आगमन का एहसास होने लगता है।

नहाय-खाय कब मनाया जाता है?

नहाय-खाय कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसके अगले दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इसकी तारीख प्रत्येक वर्ष बदलती रहती है।

नहाय-खाय का इतिहास

छठ पूजा की परंपरा बहुत प्राचीन मानी जाती है। इसकी शुरुआत किसी एक घटना से जोड़कर नहीं देखी जाती। यह पर्व सूर्य उपासना, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारिवारिक सुख-समृद्धि की लोक परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में नहाय-खाय की परंपरा पीढ़ियों से निभाई जा रही है। पुराने समय में व्रती नदी या तालाब में स्नान करके मिट्टी के चूल्हे पर भोजन बनाते थे। आज भी बहुत से परिवार अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इस शुद्धता को बनाए रखते हैं।

नहाय-खाय का धार्मिक महत्व

नहाय-खाय का सामान्य अर्थ है—स्नान करके शुद्ध और सात्त्विक भोजन ग्रहण करना। इस दिन से व्रती स्वयं को कठिन निर्जला व्रत के लिए तैयार करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार नहाय-खाय से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और छठी मैया तथा सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है। यह दिन परिवार के स्वास्थ्य, सुख, संतान की मंगलकामना और मानसिक शांति से भी जुड़ा माना जाता है।

नहाय-खाय की पूजा विधि

  1. सुबह जल्दी उठकर घर, रसोई और पूजा-स्थल की अच्छी तरह सफाई करें।
  2. व्रती नदी, तालाब या घर में स्वच्छ जल से स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  3. भगवान सूर्य का ध्यान करते हुए पूजा और व्रत को श्रद्धापूर्वक पूरा करने का संकल्प लें।
  4. भोजन बनाने के लिए साफ बर्तन, शुद्ध पानी और सात्त्विक सामग्री का उपयोग करें।
  5. भोजन में प्याज, लहसुन और अधिक मसालों का प्रयोग नहीं किया जाता।
  6. परंपरा के अनुसार अरवा चावल, चने की दाल और कद्दू या लौकी की सब्जी बनाई जाती है।
  7. भोजन तैयार होने के बाद व्रती भगवान सूर्य को प्रणाम करके सबसे पहले भोजन ग्रहण करते हैं। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भोजन करते हैं।

अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अपने घर की पुरानी परंपरा को प्राथमिकता देना उचित होता है।

नहाय-खाय के लिए कद्दू-भात और चने की दाल की रेसिपी

कई क्षेत्रों में लौकी को भी कद्दू कहा जाता है। इसलिए कुछ घरों में लाल कद्दू और कुछ घरों में लौकी की सब्जी बनाई जाती है।

आवश्यक सामग्री

भात के लिए

  • अरवा चावल – 1 कप
  • पानी – आवश्यकतानुसार

चने की दाल के लिए

  • चने की दाल – आधा कप
  • हल्दी – एक चौथाई चम्मच
  • घी – 1 छोटा चम्मच
  • जीरा – आधा छोटा चम्मच
  • सेंधा या शुद्ध नमक – पारिवारिक परंपरा के अनुसार
  • पानी – आवश्यकतानुसार

कद्दू की सब्जी के लिए

  • कद्दू या लौकी – लगभग 500 ग्राम
  • देसी घी – 1 बड़ा चम्मच
  • जीरा – आधा छोटा चम्मच
  • हल्दी – एक चौथाई चम्मच
  • सेंधा या शुद्ध नमक – स्वाद एवं परंपरा के अनुसार
  • पानी – आवश्यकतानुसार

भात बनाने की विधि

  1. अरवा चावल को दो से तीन बार साफ पानी से धो लें।
  2. चावल में आवश्यकतानुसार पानी डालकर धीमी आंच पर पकाएं।
  3. चावल पकने के बाद उसे कुछ देर ढककर रखें।

चने की दाल बनाने की विधि

  1. चने की दाल को धोकर लगभग 30 मिनट के लिए पानी में भिगो दें।
  2. दाल में हल्दी और पानी डालकर कुकर में नरम होने तक पकाएं।
  3. एक छोटे पैन में घी गर्म करके जीरा डालें।
  4. जीरा चटकने के बाद इसे दाल में मिला दें।
  5. परिवार की परंपरा के अनुसार नमक डालकर दाल को कुछ मिनट उबाल लें।

कद्दू की सब्जी बनाने की विधि

  1. कद्दू या लौकी को धोकर छीलें और मध्यम आकार के टुकड़ों में काट लें।
  2. कड़ाही में देसी घी गर्म करके जीरा डालें।
  3. जीरा चटकने पर कद्दू, हल्दी और नमक डालें।
  4. सभी चीजों को मिलाकर कड़ाही को ढक दें और धीमी आंच पर पकाएं।
  5. आवश्यकता होने पर थोड़ा पानी डाल सकते हैं। सब्जी को बहुत अधिक मसालेदार न बनाएं।
  6. कद्दू नरम हो जाने पर गैस बंद कर दें।

अब नहाय-खाय का सात्त्विक कद्दू-भात और चने की दाल तैयार है।

भोजन बनाते समय ध्यान रखने वाली बातें

  • रसोई और बर्तनों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  • भोजन में प्याज और लहसुन का प्रयोग न करें।
  • भोजन चखने से पहले अपने परिवार की पूजा परंपरा का ध्यान रखें।
  • अधिक तेल और मसालों के बजाय घी और सामान्य मसालों का प्रयोग करें।
  • व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य भोजन करें।
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर व्रत रखने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

निष्कर्ष

नहाय-खाय केवल छठ पूजा की शुरुआत नहीं, बल्कि शरीर, मन और घर को पवित्र रखने का संदेश भी देता है। कद्दू-भात और चने की दाल का साधारण भोजन इस पर्व की सादगी और सात्त्विकता को दर्शाता है। इसी दिन से व्रती छठी मैया और सूर्यदेव की उपासना के कठिन नियमों का पालन शुरू करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *